पीस बॉन्ड क्या होता है? इस पर हस्ताक्षर करने के बाद लागू हो जातीं हैं ये शर्तें
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: पीस बॉन्ड का नाम सुनते ही ऐसा लगता है कि शांति कायम रखने के लिए किसी वादे पर हस्ताक्षर कराया गया है. लेकिन लोकतंंत्र में विरोध के अधिकार को शांति के ख़िलाफ़ नहीं देखा जाता है.
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 'पीस बॉन्ड' पर हस्ताक्षर करने से कोई व्यक्ति या पॉलिटिकल एक्टिविस्ट क़ानूनी शर्तों से बंध जाता है?
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
आइए समझते हैं कि पीस बॉन्ड क्या है और इस पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं के हस्ताक्षर करने के मायने क्या हैं? नेहा बोरा ने पीस बॉन्ड को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती क्यों दी है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत पुलिस और प्रशासन के पास शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई अधिकार हैं.
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
पीस बॉन्ड का प्रावधान बीएनएसएस के अध्याय 9 में है. यह किसी अपराध की सज़ा के तौर पर नहीं, बल्कि एक प्रिवेंटिव क़दम के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.
जब प्रशासन को लगता है कि किसी व्यक्ति की गतिविधियों से सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है, तो उससे एक निश्चित अवधि के लिए शांति बनाए रखने का लिखित वादा लिया जाता है. इसे ही 'पीस बॉन्ड' कहते हैं.
इमेज स्रोत, Vipin KUmar/Hindustan Times via Getty Images
बीएनएसएस की धारा 136(3) के तहत अगर कोई व्यक्ति पीस बॉन्ड भरने से मना करता है या मजिस्ट्रेट की ओर से मांगे गए ज़मानती पेश नहीं कर पाता है, तो उसे हिरासत में लिया जा सकता है.
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