सिनेमा जगत: ग्रामीण परिवेश की सच्ची कहानी पर बनी फिल्म ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में जीता दिल
बुंदेलखंड के एक छोटे से गाँव में पानी के संघर्ष और मानवीय जिजीविषा को दर्शाती स्वतंत्र फिल्म "धरती के लाल" को दर्शकों ने सराहा।
मुंबई: चकाचौंध से दूर वास्तविक यथार्थ पर आधारित सिनेमा को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित हुई फिल्म “धरती के लाल” ने न केवल आलोचकों की वाहवाही लूटी बल्कि इसे सर्वश्रेष्ठ पटकथा का पुरस्कार भी मिला।
फिल्म के निर्देशक ने कहा कि भारत की वास्तविक आत्मा उसके गाँवों में बसती है, और जब सिनेमा बिना किसी मिलावट के आम आदमी के संघर्ष को सच्चाई से दिखाता है तो वह हर दिल को छूता है।
अनुभव कश्यप (Anubhav Kashyap)
🛡️ Verified Journalistगाँव शहर की नई बातें के मुख्य पत्रकार एवं संस्थापक। ग्रामीण विकास, कृषि एवं जनसरोकार के मुद्दों पर निष्पक्ष व निर्भीक पत्रकारिता।
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