यूपी एमएलसी चुनाव में बीजेपी की कई अहम सीटों पर हार, 2027 से पहले क्या हैं संकेत?
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: 'समाजवादी पार्टी (सपा) का खाता वहां भी खुल गया, जहां नहीं खुलना चाहिए था.''
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों पर यह प्रतिक्रिया राज्य के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दी है.
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
मौर्य ने माना कि भारतीय जनता पार्टी को उम्मीद थी कि वह पिछली बार से ज़्यादा सीटें जीतेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि पार्टी नतीजों की समीक्षा करेगी और 2027 के विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेगी.
दूसरी तरफ़, सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी के समर्थकों के हवाले से यह नारा भी चर्चा में है – ''अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज तो झांकी है, पूरा यूपी बाकी है.''
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
दरअसल, उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की जिन 11 सीटों पर बीते 23 अक्तूबर को मतदान हुआ, उनमें छह सीटों पर बीजेपी और पांच पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की है.
सीटों की संख्या के लिहाज़ से बीजेपी आगे रही, लेकिन लखनऊ की स्नातक सीट पर हार, आगरा की शिक्षक सीट पर सपा की जीत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की दोनों सीटों पर सपा के कब्ज़े ने इन नतीजों को राजनीतिक रूप से अहम बना दिया है.
विधान परिषद की 11 सीटों में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़ी थीं.
ये सीटें थीं- लखनऊ स्नातक, लखनऊ शिक्षक, आगरा स्नातक, आगरा-अलीगढ़ शिक्षक, मेरठ स्नातक, मेरठ शिक्षक, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक, गोरखपुर-फ़ैज़ाबाद शिक्षक, इलाहाबाद-झांसी स्नातक, वाराणसी स्नातक और वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र.
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