रामलीला मैदान: कांग्रेस को क्या मिला, विपक्षी एकता की राह में क्या हैं चुनौतियां?
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सुबह दस बजे मिंटो ब्रिज के पास ट्रैफ़िक सामान्य चल रहा था. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के कार्यकर्ता जुटना शुरू हो रहे थे.
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
उस वक़्त ये अंदाज़ा लगाना मुश्किल था कि दोपहर होते-होते हज़ारों की तादाद में दिख रहे लोगों की संख्या लाखों तक पहुंच सकती है.
हालांकि, एक बात स्पष्ट थी, पिछले प्रदर्शनों की तुलना में इस बार समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता अधिक संख्या में दिख रहे थे. ये सिर्फ़ दिल्ली के पास के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ज़िलों से ही नहीं बल्कि पूर्वी यूपी के दूर-दूर के ज़िलों से आए थे.
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
कांग्रेस के नेतृत्व में हुई विपक्ष की इस महारैली में देश के कोने-कोने से कांग्रेस के कार्यकर्ता भी पहुंचे.
गुजरात से आए कांग्रेस कार्यकर्ता शहज़ाद ख़ान ने बीबीसी से कहा, "सिर्फ़ कांग्रेस कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि आम लोग भी बड़ी तादाद में इस महारैली में शामिल हो रहे हैं."
हालांकि, मिंटो रोड के पास बढ़ता हुआ हुजूम राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं का ही था.
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