इसराइल चुनाव: सरकार गठन में अरब पार्टियों की अहमियत बढ़ी, क्या यहूदी पार्टियां लेंगी समर्थन?
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: इसराइल की अरब पार्टियां अगली सरकार के गठन में किंगमेकर बन सकती हैं.
27 अक्तूबर को हुए चुनाव के बाद आए एग्ज़िट पोल के अनुमानों से संकेत मिलता है कि न तो बिन्यामिन नेतन्याहू के खेमे को और न ही गादी आइज़ेनकोट के नेतृत्व वाली यहूदी विपक्षी पार्टियों को अपने दम पर संसद में बहुमत मिल सकता है.
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
हालांकि, अरब पार्टियों का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि विपक्षी नेता उनकी भागीदारी या सरकार से बाहर रहते हुए समर्थन को स्वीकार करते हैं या नहीं.
चुनाव प्रचार के दौरान इस तरह के सहयोग पर आपत्तियां जताई गई थीं. आधिकारिक नतीजों का अभी इंतज़ार है.
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
चैनल 12 के एक प्रमुख एग्ज़िट पोल में 120 सदस्यीय इसराइली संसद में सीटों का अनुमान इस तरह लगाया गया है-
इस अनुमान के मुताबिक, राअम को सात और जॉइंट लिस्ट को 11 सीटें मिल सकती हैं. चैनल 13 ने थोड़ा अलग अनुमान दिया है.
इसके मुताबिक, नेतन्याहू के खेमे को 50, यहूदी विपक्ष को 53 और अरब पार्टियों को 17 सीटें मिल सकती हैं. इसलिए इन आंकड़ों को घोषित चुनावी नतीजों के बजाय एग्ज़िट पोल के अनुमान के रूप में देखा जाना चाहिए.
यहां अहम बात यह है कि नेतन्याहू विरोधी दलों के पास संसद में बहुमत होने का मतलब अपने आप एक स्थिर सरकार बनाने की स्थिति पैदा होना नहीं है.
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