पश्चिम बंगाल के एसआईआर ट्रिब्यूनल में छह महीने बाद भी लाखों अपीलें लंबित क्यों? एक जज ने बताईं वजहें
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: इमेज स्रोत, Diptendu Dutta/NurPhoto via Getty Images
भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी मोहम्मद शमीम अख़्तर के दिन की शुरुआत निर्वाचन आयोग के ऑनलाइन पोर्टल पर लॉग इन करने से होती है.
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
वह अपनी मतदाता जानकारी डालकर हर दिन अपील की स्टेट्स चेक करते हैं. लेकिन वहाँ केवल एक शब्द दिखाई देता है- 'पेंडिंग' यानी लंबित.
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से कुछ हफ़्ते पहले मतदाता सूची से 90.83 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए थे. अख़्तर भी उनमें शामिल थे.
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस का लगभग 15 साल पुराना शासन ख़त्म हुआ और पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी.
इन 90.83 लाख मतदाताओं के नाम राज्य की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान हटाए गए थे.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एसआईआर को मतदाता सूची 'शुद्ध' करने का तरीक़ा बताया था. उन्होंने मतदाता सूची से 'घुसपैठियों' के नाम हटाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया था.
लेकिन कई लोगों का दावा है कि उनसे ग़लत तरीक़े से मतदान का अधिकार छीन लिया गया. एसआईआर के विरोध में अब देशभर में लाखों लोग सड़कों पर उतर चुके हैं. इस प्रक्रिया के कारण भारत के 13 करोड़ लोगों के मतदान के योग्य होने पर अब तक सवाल उठ चुके हैं.
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