ऑनलाइन मंगाया गया सामान एक्सपायर्ड निकले तो आपके क्या अधिकार हैं?
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: ऑनलाइन ग्रॉसरी मंगाते समय ज़्यादातर लोग यह देखते हैं कि उनका ऑर्डर कितनी जल्दी पहुंचेगा. लेकिन सामान मिलने के बाद कितने लोग पैकेट पर लिखी तारीख़ भी जाँचते हैं?
हाल ही में क्विक-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म ज़ेप्टो से जुड़े एक मामले ने इसी सवाल की तरफ़ ध्यान खींचा है.
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफ़एसएसएआई) ने एक शिकायत के बाद कंपनी को नोटिस जारी किया है. शिकायत में आरोप लगाया गया कि ग्राहक को बेसन के ऐसे पैकेट मिले, जिनकी 'यूज़-बाय' तारीख़ निकल चुकी थी.
एफ़एसएसएआई के मुताबिक़, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर की गई शिकायत में कहा गया था कि बेसन के दो पैकेटों पर 'यूज़-बाय: 12-09-2026' लिखा था. इसके बाद एफ़एसएसएआई ने कंपनी से जवाब मांगा और मामले की जाँच करने को कहा.
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
इस मामले में जाँच अभी जारी है. लेकिन इस शिकायत ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
अगर ऑनलाइन मंगाया गया कोई खाद्य पदार्थ एक्सपायर्ड निकल आए तो ग्राहक क्या कर सकता है? क्या वह सिर्फ़ रिफंड मांग सकता है या मुआवज़ा भी मांग सकता है? अगर खाने की चीज़ की जगह कोई एक्सपायर्ड दवा पहुंच जाए तो क्या नियम अलग होंगे? और ऐसे मामलों में क़ानून क्या कहता है?
हमने उपभोक्ता अधिकारों और खाद्य सुरक्षा से जुड़े जानकारों से बात कर यह समझने की कोशिश की कि ऐसे मामलों में ग्राहकों के पास क्या विकल्प होते हैं और कंपनियों की क्या ज़िम्मेदारी बनती है.
सुप्रीम कोर्ट के वकील और उपभोक्ता कानून विशेषज्ञ सत्यम सिंह राजपूत के मुताबिक़, ''अगर किसी ग्राहक को ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म से एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थ मिलता है, तो वह कंपनी और विक्रेता के ख़िलाफ़ शिकायत कर सकता है. ऐसे मामलों में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई हो सकती है.''
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