एक सड़क हादसे ने महक को व्हीलचेयर पर ला दिया, लेकिन उनकी कहानी कैसे मिसाल बन गई
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: एक रैंडम दिन जीवन में वो सब कुछ बदल सकता है, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल होता है.
महक के लिए यही वो रैंडम पल था 22-23 मार्च, 2022 की दरमियानी रात. वो अपने परिवार के साथ यूपी के ग़ाज़ियाबाद से अपने होमटाउन गोरखपुर जा रही थीं.
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
उनके पापा गाड़ी चला रहे थे, सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय हो चुकी थी, महज 20-30 किमी का सफर बाकी था, तभी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया.
पहली नज़र में परिवार को लगा कि वे सभी हादसे में बाल-बाल बच गए, लेकिन महक ने तभी अपनी मम्मी से कहा, "मुझे अपने पैर महसूस नहीं हो रहे."
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
महक की उम्र तब 16 साल थी, वो नौवीं क्लास की स्टूडेंट थीं, पढ़ाई में तेज-तर्रार होने के साथ ही कथक करती थीं, फ़ुटबॉल खेलती थीं, ड्रॉइंग बनाती थीं और कहानियां भी लिखती थीं. वो दिल की डॉक्टर यानी कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहती थीं.
हादसे का क्या है, वो आकर गुजर जाता है लेकिन उसकी परछाइयां बनी रहती हैं, वो पीछा नहीं छोड़ती. कुछ लोग शैडो में जीना सीख लेते हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं क्षणों में वो कर जाते हैं, जो दूसरे लोगों के लिए एक मिसाल बनती है और हौसला देती है.
महक के स्पाइन में चोट लगी थी. उनके शरीर का निचला हिस्सा काम नहीं कर रहा था, वो खड़ी नहीं हो पा रही थीं.
महक बताती हैं, "एक्सीडेंट के तुरंत बाद मुझे स्पाइन में इतना ज़्यादा दर्द हो रहा था कि मैंने कभी उतना दर्द महसूस ही नहीं किया था, मैं ज़मीन पर लेटी हुई थी, ऊपर बस तारे ही तारे दिखाई दे रहे थे, मैंने सोचा कि इससे बेहतर क्षण क्या ही होगा, ख़त्म होने को."
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