दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद को लेकर क्या है विवाद? बेदखली के नोटिस को लेकर अलग-अलग दावे क्यों
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: एक बंद गेट के पीछे निजी सुरक्षाकर्मी, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ़) के जवान तैनात हैं.
इस गेट से क़रीब तीन सौ मीटर दूर एक मस्जिद, एक मंदिर और दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद हाल ही में हटाई गई एक झुग्गी बस्ती है.
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
गेट के बाहर झुग्गी बस्ती से हटाए गए लोग, पत्रकार और कुछ ऐसे लोग हैं जो भीतर जाना चाहते हैं. इनमें कुछ लोग मस्जिद में नमाज़ पढ़ने भी आते हैं.
लेकिन सुरक्षाकर्मी और पुलिसकर्मी किसी को भी गेट पार करने की इजाज़त नहीं देते. झुग्गी छोड़कर 45 किलोमीटर दूर दी गई जमीन पर बसने को मजबूर हुईं एक विस्थापित मजदूर महिला ने गेट के पास रोते हुए कहा- "उनका जीवन बर्बाद हो गया है. वहां न कोई सुविधा है और न कमाई का कोई जरिया."
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
गेट के पास केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन आने वाले भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) का एक नीले रंग का चेतावनी बोर्ड लगा है.
इस पर लिखा है, "यह भूमि एवं विकास कार्यालय भारत सरकार की संपत्ति है. इस भूमि पर किसी भी प्रकार का अनधिकृत क़ब्ज़ा, अतिक्रमण, निर्माण अथवा अन्य अवैध गतिविधि करना क़ानूनी अपराध है."
हालांकि, मस्जिद की ज़मीन और बोर्ड पर दर्ज सरकारी ज़मीन के बीच संबंध को लेकर विवाद है.
यह सेंट्रल दिल्ली का रेस कोर्स इलाक़ा है. प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास यहां से ज़्यादा दूर नहीं है. इस इलाक़े में आम तौर पर सुरक्षा कड़ी रहती है.
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