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‘हम बच्चों के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं’, देश में एक लाख से ज़्यादा सिंगल टीचर स्कूल

‘हम बच्चों के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं’, देश में एक लाख से ज़्यादा सिंगल टीचर स्कूल

गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: आंध्र प्रदेश के एक दूर-दराज़ के आदिवासी गांव में रमेश (बदला हुआ नाम) पहली से पांचवीं कक्षा तक के 41 बच्चों को अकेले पढ़ाते हैं. लेकिन उनकी ज़िम्मेदारी सिर्फ़ बच्चों को पढ़ाने तक सीमित नहीं है.

रमेश ने बीबीसी तेलुगू को बताया कि उन्हें स्कूल के रखरखाव, ऑनलाइन ट्रेनिंग कोर्स और मिड-डे मील जैसे प्रशासनिक काम भी देखने पड़ते हैं.

मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम

रमेश ने कहा, "बच्चों को पढ़ाने के लिए मुश्किल से ही समय मिल पाता है. उनके लिए अच्छी शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ न्याय कर पाना मुश्किल है."

इस रिपोर्ट में रमेश का नाम बदल दिया गया है, क्योंकि उन्होंने सरकार की ओर से अनुशासनात्मक कार्रवाई के डर से अपनी पहचान गुप्त रखने का अनुरोध किया था.

जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव

भारत के 'सिंगल-टीचर स्कूलों' (एकल शिक्षक स्कूल) में कई शिक्षकों के बीच ठीक से न पढ़ा पाने की निराशा और अपनी चिंता जाहिर करने का डर आम बात है.

शिक्षा मंत्रालय की यूनिफ़ाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फ़ॉर्मेशन सिस्टम फ़ॉर एजुकेशन प्लस ' (यूडीआईएसई+) रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, पूरे देश में एक लाख से ज़्यादा ऐसे स्कूल हैं, जहां सिर्फ़ एक शिक्षक है. इन स्कूलों में क़रीब 30 लाख बच्चे पढ़ते हैं.

राज्यवार बात करें तो, आंध्र प्रदेश इस सूची में सबसे ऊपर है, जहां 16,000 से अधिक 'सिंगल-टीचर स्कूल' हैं, जो भारत में सबसे ज्यादा हैं.

यूडीआईएसई+ के आंकड़ों से पता चलता है कि 2022-23 के बाद से भारत में एक शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या हर साल घटी है. इस अवधि में ऐसे स्कूलों की संख्या 1.18 लाख से ज़्यादा से घटकर क़रीब 1.01 लाख रह गई है.

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Accredited news correspondent and investigative contributor at गाँव शहर की नई बातें (Gaun Shahar Ki Nayi Batein).

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