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वर्ल्ड बैंक ने भारत में ग़रीबी को लेकर क्या कहा है, जिसका वित्त मंत्री ने किया स्वागत

वर्ल्ड बैंक ने भारत में ग़रीबी को लेकर क्या कहा है, जिसका वित्त मंत्री ने किया स्वागत

गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: वर्ल्ड बैंक की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत ने पिछले एक दशक में आर्थिक और ग़ैर-आर्थिक मानकों पर ग़रीबी कम करने में अहम प्रगति की है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में ग़रीबी घटाने की सबसे तेज़ दर वाले देशों में भारत शामिल रहा है.

मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम

वर्ल्ड बैंक ने शुक्रवार को 'भारत की ग़रीबी और समानता' रिपोर्ट में कहा, "2011 से 2023 के बीच निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए निर्धारित ग़रीबी रेखा (4.2 डॉलर प्रतिदिन) से नीचे रहने वाली आबादी का अनुपात 57.7 फ़ीसदी से घटकर 16.1 फीसदी रह गया."

रिपोर्ट के मुताबिक़, "इस दौरान अनुमानित 49.6 करोड़ लोग ग़रीबी से बाहर आए. वहीं, ज़्यादा ग़रीबी (3 डॉलर प्रतिदिन) में रहने वाली आबादी का अनुपात 27.1 फ़ीसदी से घटकर 2.6 फ़ीसदी रह गया."

जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव

विश्व बैंक ने कहा कि ग़रीबी में कमी का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है. हालांकि इसकी रफ़्तार धीमी हो सकती है. 4.20 डॉलर प्रतिदिन की ग़रीबी रेखा के आधार पर ग़रीबी दर 2026 में 14.2 फ़ीसदी से घटकर 2028 तक 12.1 फ़ीसदी रहने की उम्मीद है.

विश्व बैंक ने कहा, "ग़ैर-आर्थिक मानकों पर ग़रीबी का आकलन ऑक्सफ़र्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (ओपीएचआई) के बहुआयामी ग़रीबी सूचकांक (एमपीआई) के आधार पर किया जाता है. इसके मुताबिक, 2005-06 में ग़रीबी दर 53.8 फ़ीसदी थी, जो 2019-21 में घटकर 16.4 फ़ीसदी रह गई. वर्ल्ड बैंक के बहुआयामी ग़रीबी सूचकांक के अनुसार, 2022-23 में यह दर 15.5 फ़ीसदी थी."

भारत में ग़रीबी कम हो रही है लेकिन बढ़ती आर्थिक असमानता का सवाल अब भी बना हुआ है. वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई के साथ इंडिया टुडे एक कार्यक्रम में अर्थशास्त्री संतोष मेहरोत्रा ने कहा, ''हक़ीक़त यह है कि जब आप खपत के आधार पर असमानता मापते हैं, तो इसमें हमेशा असमानता का स्तर काफ़ी कम दिखाई देता है. आय में असमानता इससे कहीं ज़्यादा होती है."

उन्होंने कहा, "भारत में हम आय का सर्वे ही नहीं करते हैं. असमानता हमारे देश की एक बहुत गंभीर समस्या है, जो और बदतर हुई है. हमें इस बात को नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए.''

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Accredited news correspondent and investigative contributor at गाँव शहर की नई बातें (Gaun Shahar Ki Nayi Batein).

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