भूत दिखना या किसी की मौजूदगी महसूस होना, हमें ऐसे अनुभव क्यों होते हैं?
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: भूतों की कहानियां कोई नई बात नहीं हैं. इंसान सदियों से ऐसी कहानियां सुनाता आया है.
प्राचीन मेसोपोटामिया की कहानियों में ऐसे भूतों का ज़िक्र मिलता है, जिनकी देखभाल उनके जीवित रिश्तेदारों को करनी पड़ती थी. चार्ल्स डिकेन्स की 'ए क्रिसमस कैरल' में भी भूत कहानी का अहम हिस्सा हैं.
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
सवाल यह है कि इतना समय बीतने के बाद भी भूतों में हमारी दिलचस्पी क्यों बनी हुई है?
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ वेस्ट जॉर्जिया में मनोविज्ञान की प्रोफ़ेसर क्रिस्टीन सिमंड्स मूर कहती हैं कि लोगों को ऐसे अनुभव ज़रूर होते हैं, जिन्हें वे 'पैरानॉर्मल' मानते हैं. आम तौर पर 'पैरानॉर्मल' उन घटनाओं को कहा जाता है, जिन्हें विज्ञान फ़िलहाल समझा नहीं पाया है.
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
वह कहती हैं, "जिस व्यक्ति को ऐसा अनुभव होता है, उसके लिए वह बिल्कुल वास्तविक होता है. इसका उसकी ज़िंदगी पर बहुत गहरा असर भी पड़ सकता है."
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उस अनुभव के पीछे कोई अलौकिक शक्ति ही हो.
सिमंड्स मूर के मुताबिक़, जब किसी व्यक्ति को कोई पैरानॉर्मल अनुभव होता है, उस समय उसके दिमाग़ में कई तरह की चीज़ें चल रही हो सकती हैं.
इसकी एक वजह 'हिप्नागॉजिक स्टेट' हो सकती है. यह नींद आने और जागते रहने के बीच का समय होता है.
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