जब गुलशन कुमार की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी, बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड के आतंक का वह दौर कैसा था?
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: 12 अगस्त, 1997 की सुबह टी-सिरीज़ के मालिक गुलशन कुमार हमेशा की तरह दर्शन करने के लिए अंधेरी के एक मंदिर में गए थे. दर्शन करने के बाद जब वे बाहर आए, तो उन पर गोलियाँ चलाई गईं.
उन्हें गोली लगी. वे जान बचाने के लिए भागने लगे और पास के एक सार्वजनिक शौचालय में घुस गए. हमलावर भी उनके पीछे आ गए. उन्होंने गुलशन कुमार पर 15 गोलियाँ चलाईं.
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
गुलशन कुमार पर कुल 16 गोलियाँ चलाई गईं. उनकी मौत हो गई.
गोलीबारी के दौरान हमलावर का मोबाइल फ़ोन चालू था. दूसरी तरफ़ मौजूद व्यक्ति सब कुछ सुन सकता था. हमलावर को ऐसा करने का आदेश ही दिया गया था, ताकि दूसरी तरफ बैठा व्यक्ति पूरी बात सुन सके. यह आदेश देने वाला व्यक्ति गैंगस्टर अबू सलेम था.
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
हुसैन ज़ैदी की किताब 'डोंगरी से दुबई' में इन सभी घटनाओं का विस्तार से ज़िक्र है.
15 से 20 मिनट तक चले इस थ्रिलर जैसे घटनाक्रम ने मुंबई और फ़िल्म उद्योग को झकझोर दिया. फिरौती देने से इनकार करने पर की गई यह हत्या फ़िल्म उद्योग के लिए चौंकाने वाली और दहशत भरी घटना थी.
इससे पहले भी मार्च 1997 में निर्माता मुकेश दुग्गल की हत्या कर दी गई थी. इस हत्या के तार भी अंडरवर्ल्ड से जुड़े हुए थे.
यह वह दौर था, जब आपराधिक जगत ने बॉलीवुड में 'व्यावसायिक' दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया था. यहीं से फ़िल्म उद्योग को आतंकित करने के लिए धमकियों और हमलों का सिलसिला शुरू हुआ.
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