जस्टिस कौल की किताब में पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ के बारे में क्या लिखा है, जिस पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ फिर से सुर्ख़ियों में हैं और इसकी वजह है, उनके सहयोगी रहे जस्टिस संजय किशन कौल के दावे.
जस्टिस कौल ने अपनी आने वाली किताब 'विदाउट फ़ियर ऑर फ़ेवर' में दर्ज एक घटना का ज़िक्र एक इंटरव्यू में किया है.
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
इसमें उन्होंने दावा किया कि पूर्व चीफ़ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए प्रस्तावित नामों पर औपचारिक चर्चा से पहले ही सरकार के साथ उन पर विचार-विमर्श करते थे.
जस्टिस कौल के अनुसार, उन्हें यह तरीक़ा पसंद नहीं था और यह सरकार से पहले ही 'मंज़ूरी' लेने जैसा था.
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
हालांकि, जस्टिस कौल के दावों पर 'इंडियन एक्सप्रेस' से चंद्रचूड़ ने कहा कि संजय कौल ने जो बात कही है, किस संदर्भ में कही है, उस पर अभी टिप्पणी करना मुश्किल है क्योंकि उन्होंने अभी उनकी किताब पढ़ी नहीं है.
जस्टिस कौल के बयान पर कांग्रेस ने कहा है कि जस्टिस कौल की क़िताब ने मोदी सरकार के कार्यकाल में न्यायपालिका की स्वतंत्र पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर न्यायपालिका को 'दबाव डालने और उसकी स्वतंत्रता को कमज़ोर' करने के आरोप लगाए.
जस्टिस कौल ने अपनी किताब को लेकर यह इंटरव्यू वरिष्ठ पत्रकार करण थापर को दिया है.
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