अरुणाचल प्रदेश: चीन के मेगा डैम का ‘मुक़ाबला’ करने वाले भारत के इस प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ सड़कों पर क्यों उतरे लोग
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: "अगर सियांग नदी पर बांध बन गया तो हमारा सब कुछ ख़त्म हो जाएगा. सरकार को हमारी याचिका पर गंभीरता से विचार करना चाहिए."
यह कहना है सियांग घाटी में रहने वाले आदि जनजाति के 29 साल के गुपु (बदला हुआ नाम) का.
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट सियांग, सियांग और अपर सियांग जिलों में शुक्रवार को सियांग नदी पर प्रस्तावित बांध के ख़िलाफ़ हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद पुलिस कार्रवाई से लोग डरे हुए हैं.
सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,200 मेगावाट के "सियांग अपर मल्टीपर्पज़ प्रोजेक्ट" का स्थानीय जनजातियां पिछले कई दिनों से विरोध कर रही हैं.
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
उन्हें डर है कि इस परियोजना के जलाशय में उनके गांव डूब सकते हैं और नदी के साथ उनके गहरे रिश्ते टूट सकते हैं.
शुक्रवार को 12 घंटे के बंद के दौरान इस प्रस्तावित बांध का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों का गुस्सा हिंसा में बदल गया.
इस बंद का आह्वान सियांग बांध प्रभावित क्षेत्र युवा संघ, सियांग स्वदेशी किसान मंच की युवा शाखा, आदि गैलो वेलफेयर सोसाइटी और 'जेन-ज़ी' के युवाओं ने किया था.
पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन की अनुमति लेने के बाद तोड़फोड़ की और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया.
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