चेहरा देखकर एआई बता सकेगा कि मरीज़ कितने समय तक ज़िंदा रहेगा!
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: अमेरिका के शोधकर्ताओं का कहना है कि एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल मरीज़ के चेहरे की सिर्फ़ एक तस्वीर देखकर डॉक्टरों को यह समझने में मदद कर सकता है कि मरीज़ कितना बीमार है.
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस टूल को लाखों स्वस्थ चेहरों और कैंसर मरीज़ों की 35,000 तस्वीरों पर ट्रेन किया गया है. यह आंखों के आस-पास के हिस्सों को बारीकी से देखकर अंदाज़ा लगा सकता है कि मरीज़ कितने समय तक जीवित रह सकता है.
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
शोधकर्ताओं का कहना है कि अस्पतालों में इस्तेमाल के लायक बनने में इसे अभी लंबा समय लगेगा, लेकिन उनका मक़सद है कि डॉक्टर अपने मरीज़ों के लिए सही इलाज चुन सकें.
ये शुरुआती नतीजे 'लैंसेट डिजिटल हेल्थ' जर्नल में छपे हैं.
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
इस एआई टूल का नाम 'फ़ेससर्वाइवल' है. ये टूल कहता है कि किसी की ज़िंदगी कितनी बची है, इसका अंदाज़ा लगाने के लिए चेहरे पर सबसे ज़रूरी हिस्सा है आंखों के नीचे की जगह और दोनों आंखों के बीच नाक का ऊपरी हिस्सा.
किसी मरीज़ के कितने समय तक जीवित रहने की संभावना है, इसका अनुमान लगाते समय यह टूल चेहरे के इन्हीं हिस्सों को सबसे ज़्यादा अहमियत देता है.
शोधकर्ताओं का कहना है कि ये पैमाने कई तरह के कैंसर पर सही बैठते हैं, चाहे वो हल्के हों या गंभीर. इनमें वो मामले भी शामिल थे जिनमें कैंसर मरीज़ की हड्डियों या दिमाग़ तक फैल चुका था.
इस टूल को तैयार करने के लिए जिन कैंसर मरीज़ों की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया, उनमें ज़्यादातर कैंसर मरीज़ अमेरिका और नीदरलैंड्स के थे और उनकी उम्र 50 से 70 साल के बीच थी. लेकिन कुछ मरीज़ बच्चे थे, तो कुछ 90 साल से ज़्यादा उम्र के थे.
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