मुकेश अंबानी से मिलने जामनगर क्यों गए अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 6 महीने के भीतर दूसरी बार भारत के दौरे पर थे.
इस दौरे के दौरान सबसे ज़्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि रुबियो ने दिल्ली के बजाय जामनगर जाने का फैसला क्यों किया और गुजरात की एक रिफ़ाइनरी का भारत-अमेरिका संबंधों के भविष्य से आख़िर क्या लेना-देना है?
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
मुंबई में रुबियो की टाटा और अडानी समूह के प्रतिनिधियों से मुलाक़ात और जामनगर में मुकेश अंबानी के साथ बातचीत इस बात की ओर इशारा करती है कि भारत की कारोबारी ताक़त और देश की विदेश नीति के बीच रिश्ता लगातार गहरा होता जा रहा है.
उधर अमेरिका में ईंधन की क़ीमतें बढ़ रही हैं और नवंबर में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं. ट्रंप अपने दोनों कार्यकालों के दौरान अब तक की सबसे कम अप्रूवल रेटिंग का सामना कर रहे हैं.
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
ऐसे में भारत के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ाना और भारतीय कंपनियों से अमेरिका में ज़्यादा निवेश हासिल करना अमेरिकी सरकार की अहम प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है.
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत और अमेरिका के रिश्तों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं. दोनों देशों के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजहों में से एक रूस से भारत की तेल खरीद पर अमेरिका का दबाव रहा है. ऐसे माहौल में अमेरिकी ऊर्जा रणनीति में रिलायंस की बढ़ती अहमियत एक बड़ा सवाल खड़ा करती है.
क्या भारत इस कंपनी के आर्थिक प्रभाव का इस्तेमाल कूटनीतिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए कर सकता है?
और जब कारोबारी हित विदेश नीति के साथ पहले से ज़्यादा गहराई से जुड़ते जा रहे हैं, तो भारत के कूटनीतिक फ़ैसलों पर निजी कंपनियों का प्रभाव आख़िर कितना बढ़ने वाला है?
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