कराची का मोहट्टा पैलेस: हिंदू कारोबारी का घर जिसे देखकर ठहर जाती है नज़र
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: पाकिस्तान में कराची के लोग जब क्लिफ़्टन के समुद्र तट की ओर जाते हैं, तो रास्ते में उन्हें गुलाबी और पीले पत्थरों से बनी एक पुरानी इमारत दिखाई देती है. इस इमारत से नज़रें हटाए बिना वहां से गुज़रना मुश्किल है.
कराची की इस बिल्डिंग का नाम मोहट्टा पैलेस है. इसे देखकर इंसान उस दौर में पहुंच जाता है, जब समुद्र की शोर मचाती लहरें क्लिफ़्टन के किनारे से टकराती थीं.
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
उसी दौर में एक हिंदू मारवाड़ी कारोबारी के मन में समुद्र के बिल्कुल पास यह इमारत बनवाने का ख़्याल आया था. उस कारोबारी का नाम शिव रतन चंद्र रतन मोहट्टा था. उन्होंने अपनी पत्नी के लिए ये महल बनवाया था.
इस महल को बनाने में ख़ास तौर पर जोधपुरी गुलाबी पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है.
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
कराची पर शोध करने वाले दिवंगत पत्रकार अख़्तर बलोच, शोधकर्ता इक़बाल ए. रहमान मांडविया और इतिहासकार उस्मान दमूही ने अपने लेखों में मोहट्टा पैलेस का विस्तार से ज़िक्र किया है.
इक़बाल ए. रहमान मांडविया ने अपनी किताब में लिखा है, "शिव रतन मोहट्टा ने कराची में लोहे का कारख़ाना लगाया था. इसके अलावा उन्होंने सिंध में ख़दरो के पास एक चीनी मिल भी लगाई थी.
चीनी को पास के रेलवे स्टेशन तक आसानी से पहुंचाने के लिए उन्होंने रेल की पटरी भी बिछवाई थी. यह 1939 की बात है."
शिव रतन मोहट्टा के छोटे भाई गोपाल गोरधन दास मोहट्टा ने कराची में हिंदू जिमख़ाना बनवाया था.
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