जामिया मिल्लिया: अलीगढ़ से दिल्ली कैसे आई वो यूनिवर्सिटी, जिसके लिए गांधी भीख मांगने को तैयार थे
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: इमेज स्रोत, Ishant Chauhan/Hindustan Times via Getty Images
दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ की बहाली और चुनाव की निश्चित तारीख़ घोषित करने की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन बुधवार को 17वें दिन भी जारी है.
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
जामिया में छात्र संघ का चुनाव 2006 से नहीं हुआ है. प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांग है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (जेएमआईएसयू) को बहाल किया जाए और चुनाव की तारीख़ और पूरा कार्यक्रम घोषित किया जाए.
छात्रों ने 12 अक्तूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी. प्रदर्शन के दौरान छात्रों के ख़िलाफ़ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और सुरक्षाकर्मियों के कथित दुर्व्यवहार की जांच जैसी मांगें भी इसमें जुड़ गईं.
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
इमेज स्रोत, Arvind Yadav/Hindustan Times via Getty Images
26 अक्तूबर को जामिया प्रशासन ने कहा कि छात्र संघ के संविधान को मंज़ूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे. प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान जारी किए गए निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने और सुरक्षाकर्मियों के व्यवहार की जांच के लिए समिति बनाने की बात भी कही.
लेकिन छात्र इससे संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि प्रशासन ने यह नहीं बताया कि छात्र संघ के संविधान को कब तक मंज़ूरी दी जाएगी. इसलिए चुनाव कराने की कोई निश्चित तारीख़ अब भी सामने नहीं आई है.
इस बीच जामिया प्रशासन ने 28 अक्तूबर को जारी एक बयान में आरोप लगाया कि 27 अक्तूबर की रात कैंपस में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ और यूनिवर्सिटी की सुरक्षा व्यवस्था को नुक़सान पहुंचाया गया.
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है
इस खबर पर सबसे पहले अपनी राय साझा करें और चर्चा शुरू करें!