झारखंड: साड़ी में नंगे पांव दौड़ने वाली कविता महतो का ख़्वाब रह गया अधूरा
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: "सुबह जब मैं पाँच बजे घर से निकली तो नहीं सोचा था कि गुज़रे कई महीनों की मेहनत हाई जंप के दौरान पैर के ज़रा स्लिप करने से बर्बाद हो जाएगी."
ये शब्द कविता महतो के हैं. 25 अक्तूबर को रामगढ़ ज़िले में होमगार्ड भर्ती के लिए हो रहे ट्रायल में भाग ले रही थीं.
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
इस ट्रायल के लिए कविता को मुफ़्त कोचिंग देने वाले ट्रेनर अंकित अग्रवाल भी बेहद निराश हैं.
अंकित बीबीसी हिन्दी से कहते हैं, "हमें उम्मीद नहीं थी कि कविता जी हाई जंप के दौरान इस तरह असफल हो जाएंगी, अभ्यास के दौरान वह दौड़ की तरह हाई जंप में भी निपुण प्रतीत होती थीं."
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
अंकित कहते हैं, "कविता जी तो पहले राउंड में हुई सोलह सौ मीटर दौड़ में आसानी से कामयाब हो गई थीं. काश इसी तरह वह हाई जंप में भी सफल हो जातीं."
ट्रेनर की तरह कविता भी निराश हैं. वह कहती हैं कि "इस असफलता से जो आघात लगा है उससे उबरने में शायद महीनों लग जाएं."
कविता की कहानी उन करोड़ों महिलाओं के जीवन का जीवंत दस्तावेज है जो विपरीत परिस्थितियों के चक्रव्यूह में फंसकर भी टूटती नहीं हैं.
दरअसल पाँच साल की लंबी बीमारी के बाद कविता के पति की साल 2023 में मौत हो गई थी.
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