मध्य प्रदेश: कहीं 5 तो कहीं 33,500 रुपये प्रति लीटर में ख़रीदा फ़िनाइल, सरकारी ख़रीद में इतना फ़र्क क्यों?
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: फ़िनाइल की एक लीटर की बोतल मध्य प्रदेश के एक नगरीय निकाय ने 33 हज़ार 500 रुपये में ख़रीदी, जबकि इतनी ही मात्रा का फ़िनाइल मध्य प्रदेश के एक दूसरे नगरीय निकाय ने महज़ पांच रुपये की दर से ख़रीदा.
इन नगरीय निकायों या सिविक बॉडीज़ ने कचरा उठाने के लिए जो गाड़ियां ख़रीदीं, उनकी कीमतों में भी भारी अंतर सामने आया. एक नगरीय निकाय ने दो लाख रुपये में कचरा वाहन ख़रीदा, जबकि दूसरे ने चार डस्टबिन के साथ ऐसी ही गाड़ी के लिए छह लाख रुपये ख़र्च किए.
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
सरकारी ख़रीद में इस बड़े अंतर का मामला तब सामने आया, जब इन निकायों से जुड़े अफ़सरों को फटकार लगाने वाली एक बैठक का वीडियो वायरल हो गया.
मध्य प्रदेश के 374 नगरीय निकायों में बीते तीन साल में की गई ख़रीद का विश्लेषण करने पर ये तथ्य सामने आए हैं. इन सरकारी ख़रीदों में अनियमितताओं से जुड़े आंकड़े दर्शाने वाला एक प्रेज़ेंटेशन भोपाल में हुई बैठक में पेश किया गया.
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी ने इन डॉक्यूमेंट्स को तैयार करने वाले अधिकारी से बात की, जिन्होंने आंकड़ों की तस्दीक की है.
यह अधिकारी मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के अतिरिक्त प्रबंध निदेशक अंशुमन राज हैं. उन्होंने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बातचीत में यह भी बताया कि यह एनालिसिस करने के लिए एआई की भी मदद ली गई.
उन्होंने बीबीसी को बताया, "यह पहल किसी शिकायत पर नहीं, बल्कि विभाग ने ख़ुद शुरू की थी."
वहीं, नगरीय प्रशासन विभाग की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की बात कही है.
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