एसआईआर पर चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में जवाब: ‘फ़ैसले ज्ञानेश कुमार ने अकेले नहीं लिए’
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एफ़िडेविट में कहा है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेसिव रिवीज़न- एसआईआर) से जुड़े सभी फ़ैसले आयोग ने सर्वसम्मति से लिए थे.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और चुनाव आयोग के कुछ फ़ैसलों की वैधता को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका के जवाब में दाख़िल हलफ़नामे में आयोग ने उन आरोपों से इनकार किया है कि दूसरे दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एसआईआर से जुड़े फ़ैसले अकेले लिए थे.
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
यह हलफ़नामा राकेश कुमार सिंह की ओर से दाख़िल रिट याचिका के जवाब में दिया गया है. इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया था.
यह याचिका इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद दाख़िल की गई थी. रिपोर्ट में दावा किया गया था कि एसआईआर से जुड़े 14 अहम फ़ैसले चुनाव आयोग के नाम पर लिए गए, जबकि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इन पर आपत्तियां दर्ज की थीं.
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए चुनाव आयोग ने हलफ़नामें में कहा है कि एसआईआर से जुड़े 24 जून 2025, 27 अक्तूबर 2025 और 14 मई 2026 के तीनों आदेश आयोग के सर्वसम्मत फ़ैसले थे.
उप चुनाव आयुक्त भानु प्रकाश येतुरू की ओर से दाख़िल हलफ़नामे में कहा गया है कि इसे मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंज़ूरी दी है.
आयोग ने दलील दी कि यह याचिका पूरी तरह एक अख़बार की रिपोर्ट पर आधारित है और याचिकाकर्ता ने उसमें किए गए दावों की तथ्यात्मक सच्चाई की स्वतंत्र रूप से संबंधित पक्षों से पुष्टि नहीं की. इसलिए यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है.
आयोग ने यह भी कहा कि उसने कभी किसी आंतरिक नोट या फ़ाइल को मीडिया में जारी नहीं किया और न ही ऐसा करने की अनुमति दी.
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है
इस खबर पर सबसे पहले अपनी राय साझा करें और चर्चा शुरू करें!