सऊदी अरब और अमेरिका से क़रीबी के बावजूद ईरान पाकिस्तान पर भरोसा क्यों करता है?
गाँव शहर की नई बातें — विशेष रिपोर्ट: सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने सोमवार को तेहरान में ईरानी नेताओं से मुलाक़ात की.
इसका मक़सद तनाव कम करना और बातचीत को फिर से शुरू करना है. ईरान पर एक बार फिर से अमेरिका और इसराइल के हमले का ख़तरा मंडरा रहा है.
मुख्य विवरण एवं घटनाक्रम
सऊदी अरब के रक्षा मंत्री ख़ालिद बिन सलमान, पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर और तुर्की की ख़ुफ़िया एजेंसी के प्रमुख इब्राहिम कालिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान के साथ बातचीत की.
ये बैठकें अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन से क़रीब एक सप्ताह पहले हो रही हैं.
जमीनी पड़ताल व जनहित पर प्रभाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार संकेत दिया है कि कई महीनों से जारी गतिरोध के बाद वह ईरान पर फिर से बमबारी शुरू कर सकते हैं.
युद्ध की आशंकाओं के कारण ही कच्चे तेल की क़ीमत 117 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुँच गई है.
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरआईबी न्यूज़ के मुताबिक, बैठक में ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियान ने कहा, "ईरान क्षेत्रीय सहयोग को गहरा करने, मतभेदों को सुलझाने और इस्लामी देशों की साझा क्षमताओं का इस्तेमाल करने की दिशा में क़दम उठाने के लिए तैयार है."
ईरान पर इसराइल और अमेरिका के हमले के बाद शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में पाकिस्तान अहम मध्यस्थ के तौर पर उभरा है.
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